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Monday, December 3, 2018

समय–बोध से सम्बन्धित कविताएँ

गोपू भैया
घड़ी पहनकर गोपू भइया, ले बस्ता स्कूल गए , मिला राह में एक मदारी, गोपू जी सब भूल गए । ।
गोपू जी रुक गए घड़ी ने, तब बतलाई बात , रुको नहीं चल पड़ो कि जैसे मैं चलती दिन रात । ।

घड़ी
टिक–टिक–टिक–टिक चलती है, घड़ी कभी न रुकती है ।
हमको है यह पाठ सिखाती, कितनी अच्छी बात बताती । ।
काम समय से करना सीखो, हरदम आगे बढ़ना सीखो । ।

पशु–सम्बन्धित कविताएँ

चूहा मुन्ना
चूहा मुन्ना जाग रहा था, माँ के आगे भाग रहा था ।
तेज दौड़ कर माँ ने रोका, दूध लिए तब माँ ने टोका ।।
चीं–चीं चूहा मुन्ना बोला, नहीं पिऊँगा दूध मैं अम्मा । 
रबड़ी और मलाई लाओ, मुझे मिठाई खूब खिलाओ ।।

बिल्ली
बिल्ली आई एक अनोखी, लाई साथ में सीटी चोखी ।
सीटी खूब बजाती है, दूध मलाई खाती है । ।
अम्मा डाँट लगाती हैं, भाग के वह छिप जाती है । ।

अनुशासन से सम्बन्धित कविताएँ

सोच समझ कर मुख को खोलो, कभी न गन्दी बातें बोलो ।
सदा बड़ों की बातें मानो, अनुशासन में रहना जानो । ।

प्यारे बच्चे
पढ़ते लिखते रहते जो, प्यार दुलार  पाते वह ।
खाते खेलते भी जो, आँखों के तारे हैं वह । ।
अनुशासन में रहते जो, टीचर के प्यारे हैं वह ।
माँ की बात मानें जो, सबसे ही न्यारे हैं वह । ।

अच्छे बच्चे
सूरज से हम चम चम चमकें, चन्दा से शीतल मन होवें ।
पुष्पों की खुश्बू से हम सब, महकें अपने घर आँगन में ।
कोयल सा हम मीठा बोलें, चिड़िया सा हम हँस कर खेलें ।
कुत्ते सी हम आज्ञा मानें, मोर समान नाचते डोलें । ।

भावप्रधान कविताएँ

प्यारे भइया
प्यारे–प्यारे भइया, राजदुलारे भइया ।
सबसे प्यारे भइया, आँखों के तारे भइया । ।


प्यारी गुड़िया
प्यारी–प्यारी गुड़िया, शक्कर की पुड़िया ।
शक्कर मीठी नहीं है, जितनी मीठी गुड़िया । ।


शैतान गुड़िया
देखो मेरी गुड़िया रानी, करती है कितनी शैतानी ।
पूड़ी सब्जी खूब बनाती, फेंके बर्तन, डाले पानी । ।


बन्दर राजा
बन्दर राजा घूम रहे हैं, डाल–डाल पर कूद रहे हैं ।
भूख लगी तो तोड़े आम, डण्डा पड़ा भूल गए नाम । ।

वातावरण से परिचय

बादल
टहल रहे हैं बादल सारे, कितने सुन्दर कितने प्यारे ।
पानी लाते रिमझिम कर हैं, बच्चों की आँखों के तारे । ।

तारे और मुन्ना राजा
टिम–टिम तारे चमक रहे हैं, आँख मिचौली खेल रहे हैं ।
चंदामामा देख रहे हैं, मुन्ना राजा सोच रहे हैं । ।

रेल
छुक–छुक, छुक–छुक खेलें खेल, देखो कितनी सुन्दर रेल ।
राजू , पिंकी, मुन्ना, भइया, सब चलते हैं ठेलम ठेल । ।
इंजन बना हुआ है राजू , गार्ड बना है प्यारा पप्पू ।
छुक–छुक करती भागे रेल, दिल्ली आया रुक गई मेल । ।

तारे
आसमान में निकले तारे, कितने सुन्दर कितने प्यारे ।
चम–चम चमक रहे हैं तारे, लगते अच्छे तारे न्यारे । ।

संस्कृति का ज्ञान

रक्षाबन्धन
रक्षाबन्धन का त्योहार, भाई बहन का अनुपम प्यार ।
राखी बाँधे बहन, भाई दे उसको रक्षा का उपहार । ।


महीने के दिन
अप्रैल, जून, सितम्बर, नवम्बर इनके दिन हैं तीस ।
अट्ठाइस दिन की फरवरी, बाकी सब इकतीस । ।

स्वच्छता से सम्बन्धित कविता

साफ सुथरे बच्चे
सबके मन को भाते बच्चे, फूलों से मुस्काते बच्चे ।
साफ सुथरे रहते जो, रोज ही नहाते जो । ।
दाँत साफ रखते जो, कपड़े साफ रखते जो ।
सबके मन को भाते वो, फूलों से मुस्काते जो । ।

स्वास्थ्य (आहार) से सम्बन्धित कविताएँ

डॉक्टर बन्दर
बन्दरिया जी की शादी में, दूल्हा डॉक्टर बन्दर ।
बर्फी, लड्डू , हलवा, पूड़ी, थाली आयी सज कर । ।
तिनक उठ खड़ा दूल्हा बोला, नहीं खाऊँगा ये सब ।
मुझे चाहिए पौष्टिक भोजन, रोटी, दाल और पालक ।
पत्ते वाली सब्जी हो और लाल चुकन्दर गाजर । ।

इसी प्रकार समभाव की कविता
डॉक्टर दूल्हा
दीदी जी की शादी में, दूल्हा आया डॉक्टर ।
पकवानों से सजे थाल को, लेकर आया नौकर । ।
जीजा बोले तब गुस्से में, लाये हो ये क्यों कर ।
रोटी, सब्जी, दाल, दूध ही भोजन होता रुचिकर । ।

चना–मूँग
चना, मूँग और मोठ भिगोकर, जिसने–जिसने खाया ।
टीका हँस–हँस कर जिसने भी, डॉक्टर से लगवाया । ।
मट्ठा, सब्जी, दालें खाकर, स्वस्थ शरीर बनाया ।
खेलकूद में और पढ़ने में, अव्वल नम्बर पाया । ।

करेला
सुन्दर प्यारा–प्यारा, लगता सबसे न्यारा ।
हरा करेला आया, सबके मन को भाया । ।
सब्जी जिसने खाया, फुड़िया दूर भगाया ।
सुन्दर प्यारा–प्यारा, लगता सबसे न्यारा । ।

पौष्टिक आहार
खाएँ हम सब ऐसे, खिल जाएँ फूल जैसे ।
चने की दाल के साथ, मक्का की रोटी , पालक के शाक के साथ चने की रोटी ।
खाएँ हम सब ऐसे, खिल जाएँ फूल जैसे , हरे पत्ते की सब्जी, रोटी मोटी–मोटी ।
पालक की सब्जी, रोटी छोटी–छोटी , खाएँ हम सब ऐसे, खिल जाएँ फूल जैसे । ।

नीम
चैत की बयार में, कोपल है नीम की ,शुद्ध करे रक्त को, है बहुत कीमती ।
 रोगों को दूर करे, फोड़ों को नष्ट करे , रोज खाओ, न कोई जरूरत हकीम की । ।

तुलसी
नित्य चार पत्ती तुलसी की, जो कोई है खाता ।
सब रोगों को दूर भगाकर, लम्बी सैर लगाता । ।

चरित्र निर्माण से सम्बन्धित कविताएँ

बत्ती
हुई रात तब मुन्ना पढ़ते, बत्ती वहीं जलाते हैं ।
पढ़–लिख कर जब सोने जाते, बत्ती बन्द कर जाते हैं । ।

खाना
अपनी माँ जो खाना देती, सबसे अच्छा खाना देती ।
गोलू की पूड़ी मत देखो, पिंकी की चूड़ी मत देखो । ।
अपना घर है छोटा प्यारा, सबसे सुन्दर सबसे न्यारा । ।

फूल
कितने सुन्दर कितने प्यारे, फूल खिले हैं न्यारे–न्यारे ।
नहीं तोड़ कर उन्हें गिराओ, उन जैसे तुम भी मुस्काओ । ।

समयबद्धता
उठो सवेरे शीश नवाओ, दाँत साफ कर रोज नहाओ ।
करो कलेवा, पढ़ने जाओ, विद्यालय से न कतराओ । ।
पढ़ना सीखो, लिखना सीखो, कभी नहीं तुम लड़ना सीखो ।
भेदभाव को दूर भगा कर, मिल जुल कर तुम रहना सीखो ।